यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स की होगी थर्ड पार्टी क्वालिटी जांच, IIT कानपुर करेगा ऑडिट
सड़क, पुल और सीवर समेत बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर होगी TPQA, 8 मंडलों में चलेगी गुणवत्ता जांच

यूपी में ₹100 करोड़ से बड़े प्रोजेक्ट्स पर IIT की नजर, अब होगी थर्ड पार्टी क्वालिटी जांच
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता को लेकर योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट्स की थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TPQA) कराई जाएगी। इस जांच के दायरे में सड़क, पुल, सीवर और अन्य बड़े निर्माण कार्य आएंगे। सरकार का उद्देश्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और परियोजनाओं में किसी भी तरह की लापरवाही को रोकना है। आजतक की मूल रिपोर्ट
IIT कानपुर करेगा बड़े प्रोजेक्ट्स की जांच
इस व्यवस्था के तहत IIT कानपुर को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। IIT कानपुर की टीम निर्धारित क्षेत्रों में चल रहे ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता की स्वतंत्र रूप से जांच करेगी।
इसका मकसद यह पता लगाना होगा कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों और तकनीकी specifications के अनुसार किए जा रहे हैं या नहीं।
8 मंडलों के प्रोजेक्ट्स पर नजर
पहले चरण में IIT कानपुर को प्रदेश के 8 मंडलों में चल रहे बड़े प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें शामिल हैं:
कानपुर मंडल
लखनऊ मंडल
बांदा मंडल
प्रयागराज मंडल
अयोध्या मंडल
आगरा मंडल
झांसी मंडल
देवीपाटन मंडल
इन मंडलों के जिलों में चल रहे ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट्स को थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट के दायरे में लाया जाएगा। आजतक की रिपोर्ट
सड़क, पुल और सीवर प्रोजेक्ट्स की होगी जांच
थर्ड पार्टी ऑडिट के तहत अलग-अलग प्रकार के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की जांच की जाएगी। इनमें मुख्य रूप से सड़क निर्माण, पुल, सीवर और अन्य बड़े निर्माण कार्य शामिल हैं।
ऑडिट के दौरान निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल की जा रही सामग्री और परियोजना के तकनीकी मानकों का परीक्षण किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार हो रहे प्रोजेक्ट्स लंबे समय तक टिकाऊ रहें।
सरकार ने क्यों लिया फैसला?
बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में बड़ी सरकारी धनराशि खर्च होती है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता खराब होने पर सरकारी धन का नुकसान होने के साथ-साथ लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
थर्ड पार्टी क्वालिटी ऑडिट का फायदा यह होगा कि परियोजना से सीधे जुड़े विभागों के अलावा एक स्वतंत्र तकनीकी संस्था भी काम की गुणवत्ता का आकलन करेगी।
IIT जैसी तकनीकी संस्था की जांच से निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
गुणवत्ता में कमी मिली तो होगी कार्रवाई
थर्ड पार्टी ऑडिट के दौरान यदि किसी प्रोजेक्ट में निर्माण गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई जाती है तो संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी से जवाब मांगा जा सकता है।
ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधार कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है। इससे निर्माण एजेंसियों पर भी काम की गुणवत्ता बनाए रखने का दबाव रहेगा।
बड़े विकास कार्यों की निगरानी होगी मजबूत
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में सड़क, एक्सप्रेसवे, पुल, सीवर, शहरी विकास और अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निर्माण परियोजनाएं चल रही हैं। इन परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
ऐसे में सरकार अब केवल प्रोजेक्ट पूरा करने के बजाय उसकी गुणवत्ता और टिकाऊपन पर भी विशेष ध्यान दे रही है। ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाले प्रोजेक्ट्स को TPQA के दायरे में लाने का फैसला इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
IIT की तकनीकी विशेषज्ञता का होगा इस्तेमाल
IIT कानपुर देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों में शामिल है। बड़े निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच में संस्थान की विशेषज्ञता का इस्तेमाल किया जाएगा।
इससे परियोजनाओं की जांच सामान्य प्रशासनिक निरीक्षण के बजाय तकनीकी और स्वतंत्र नजरिए से किए जाने की उम्मीद है। सरकार इस व्यवस्था के जरिए बड़े प्रोजेक्ट्स में गुणवत्ता संबंधी खामियों को शुरुआती स्तर पर पकड़ना चाहती है।
आने वाले समय में बढ़ सकता है दायरा
फिलहाल IIT कानपुर को 8 मंडलों में ₹100 करोड़ से अधिक लागत वाली परियोजनाओं की जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इस व्यवस्था के अनुभव और रिपोर्ट के आधार पर भविष्य में इसका दायरा अन्य क्षेत्रों और परियोजनाओं तक बढ़ाया जा सकता है।
कुल मिलाकर योगी सरकार का यह फैसला बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम कदम है। अब करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाली सड़कों, पुलों और सीवर जैसी परियोजनाओं पर स्वतंत्र तकनीकी जांच की नजर रहेगी। आजतक की मूल खबर
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