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सहारनपुर में काजी परिवार की सियासी जंग, इमरान मसूद से शायान-हमजा तक बढ़ी तकरार

कभी बंद कमरों में तय होते थे सियासी फैसले, अब सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों में खुलकर सामने आ रहे परिवार के मतभेद

# सहारनपुर के काजी परिवार में सियासी संग्राम, बंद कमरों की लड़ाई अब सड़क पर

**सहारनपुर:** पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सहारनपुर का काजी परिवार लंबे समय से एक प्रभावशाली राजनीतिक घराना रहा है। काजी मसूद से शुरू हुई राजनीतिक विरासत को पूर्व केंद्रीय मंत्री काजी रशीद मसूद ने राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया और बाद में उनके परिवार की अगली पीढ़ी ने इसे आगे बढ़ाया। लेकिन अब इसी परिवार के भीतर की सियासी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। जो राजनीतिक फैसले और मतभेद अब तक बंद कमरों तक सीमित रहते थे, वे सोशल मीडिया वीडियो और सार्वजनिक बयानों के जरिए लोगों के सामने आ गए हैं।

मौजूदा विवाद में एक तरफ कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और उनके भतीजे हमजा मसूद नजर आ रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद और परिवार के एक अन्य सदस्य शादान मसूद हैं। शायान मसूद के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद परिवार की राजनीतिक खींचतान और ज्यादा खुलकर सामने आई है।

## कैसे शुरू हुई काजी परिवार में सियासी रार?

काजी परिवार में ताजा विवाद उस समय तेज हुआ, जब कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ऐलान किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में उनके परिवार का कोई भी सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। इसके बाद उनके दामाद शायान मसूद और चचेरे भाई शादान मसूद ने लखनऊ में समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया।

शायान मसूद ने सपा में शामिल होने के बाद इमरान मसूद की राजनीतिक विचारधारा से असहमति भी जताई। इसके बाद परिवार के भीतर राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आने लगे। इमरान मसूद ने इस पर सीधे प्रतिक्रिया देने से परहेज किया, लेकिन उनके भतीजे हमजा मसूद ने सोशल मीडिया के जरिए शायान पर तीखा हमला बोला।

## हमजा मसूद ने शायान पर लगाए गंभीर आरोप

हमजा मसूद ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में शायान मसूद पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उनकी बहन के साथ पिछले करीब पांच वर्षों से गलत व्यवहार किया जा रहा था और कथित तौर पर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया गया।

हमजा ने यह भी आरोप लगाया कि उनकी बहन के बेटे के साथ भी ज्यादती हुई। उन्होंने कहा कि वह अब तक परिवार और अपने पिता की स्थिति को देखते हुए चुप रहे, लेकिन राजनीतिक घटनाक्रम के बाद मामला सार्वजनिक हो गया।

हमजा ने यह आरोप भी लगाया कि परिवार के कुछ लोग इमरान मसूद की राजनीतिक स्थिति को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इन आरोपों से जुड़े सबूत हैं।

हालांकि, ये आरोप हमजा मसूद की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

## शायान मसूद ने दिया पलटवार

हमजा मसूद के आरोपों के बाद शायान मसूद ने भी वीडियो जारी कर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि राजनीतिक मतभेदों को लेकर परिवार की निजी बातें सार्वजनिक की जा रही हैं।

शायान ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनके राजनीतिक सवालों का जवाब नहीं दिया जा रहा है, इसलिए उन पर निजी हमले किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास भी कई वीडियो हैं, लेकिन वह परिवार की अंदरूनी बातों को सार्वजनिक नहीं करना चाहते।

इस तरह दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप ने काजी परिवार के पुराने मतभेदों को सार्वजनिक बहस का हिस्सा बना दिया है।

## काजी परिवार की राजनीतिक विरासत कितनी पुरानी?

सहारनपुर में काजी परिवार की राजनीतिक कहानी कई दशक पुरानी है। इसकी शुरुआत काजी मसूद और उनके परिवार से हुई। काजी मसूद 1969 में निर्दलीय विधायक चुने गए थे। इसके बाद उनके परिवार की राजनीतिक पकड़ लगातार मजबूत होती गई।

काजी मसूद के बेटों में से रशीद मसूद ने सक्रिय राजनीति में बड़ी पहचान बनाई। उन्होंने 1974 में नकुड़ विधानसभा सीट से चुनाव जीता और बाद में सांसद तथा केंद्र सरकार में मंत्री बने। 1977 से 2004 के बीच वह सहारनपुर लोकसभा सीट से पांच बार सांसद चुने गए और तीन बार राज्यसभा के सदस्य भी रहे।

इसी राजनीतिक विरासत ने काजी परिवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में मजबूत स्थान दिलाया।

## इमरान मसूद और रशीद मसूद की राहें हुईं अलग

काजी परिवार की राजनीति हमेशा एक जैसी नहीं रही। 2012 तक इमरान मसूद और उनके चाचा रशीद मसूद राजनीतिक रूप से साथ रहे, लेकिन इसके बाद दोनों की राजनीतिक राहें अलग हो गईं। परिवार के अलग-अलग सदस्यों के अलग राजनीतिक दलों में जाने से राजनीतिक मतभेद और गहरे होते गए।

इमरान मसूद बाद में सहारनपुर की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाने में सफल रहे। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सहारनपुर से जीत हासिल की और कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में शामिल हुए।

## रिश्तों का भी है दिलचस्प गणित

काजी परिवार की मौजूदा सियासी कहानी में रिश्तों का समीकरण भी काफी अहम है। इमरान मसूद और नोमान मसूद एक ही परिवार से हैं, जबकि रशीद मसूद के बेटे शादान मसूद हैं। शायान मसूद, शादान मसूद के बेटे हैं।

खास बात यह है कि इमरान मसूद ने अपनी बेटी की शादी अपने चचेरे भाई शादान मसूद के बेटे शायान मसूद से की थी। इस रिश्ते के कारण शायान मसूद इमरान मसूद के भतीजे होने के साथ-साथ उनके दामाद भी हैं।

यही पारिवारिक रिश्ता अब राजनीतिक मतभेद के कारण चर्चा में है।

## सपा में शायान की एंट्री ने बढ़ाई हलचल

शायान मसूद के समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद परिवार के भीतर राजनीतिक समीकरण बदलते नजर आए। इमरान मसूद जहां कांग्रेस में हैं, वहीं शायान ने सपा का रुख किया है।

इससे काजी परिवार की अगली पीढ़ी के बीच राजनीतिक भविष्य और विरासत को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। एक ओर इमरान मसूद के साथ उनके भतीजे हमजा मसूद दिखाई दे रहे हैं, जबकि दूसरी ओर शायान और शादान मसूद सपा के साथ अपनी राजनीतिक जमीन तैयार करने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं।

## राजनीतिक विरासत पर अगली पीढ़ी की नजर

काजी परिवार की मौजूदा लड़ाई को सिर्फ पारिवारिक विवाद के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे राजनीतिक विरासत और पश्चिमी यूपी में प्रभाव बनाए रखने की कोशिश भी एक बड़ा कारण मानी जा रही है।

हमजा मसूद खुद को इमरान मसूद की राजनीतिक विरासत से जोड़कर देखते हैं, जबकि शायान मसूद सपा के साथ अपना अलग राजनीतिक भविष्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में परिवार के भीतर यह राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और बढ़ सकती है।

## बंद कमरों से सोशल मीडिया तक पहुंची लड़ाई

काजी परिवार की खासियत रही है कि परिवार के अंदर के राजनीतिक मतभेद आम तौर पर सार्वजनिक नहीं होते थे। लेकिन इस बार सोशल मीडिया ने पूरा समीकरण बदल दिया है।

हमजा मसूद और शायान मसूद की ओर से जारी किए गए वीडियो और सार्वजनिक बयानों ने पारिवारिक विवाद को राजनीतिक चर्चा का मुद्दा बना दिया है। अब सहारनपुर ही नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इस बात की चर्चा हो रही है कि काजी परिवार की राजनीतिक विरासत आगे किसके हाथ में जाएगी।

### आगे क्या?

काजी परिवार की यह सियासी लड़ाई ऐसे समय सामने आई है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं। परिवार के अलग-अलग सदस्यों के अलग राजनीतिक दलों के साथ खड़े होने से सहारनपुर की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या काजी परिवार इस विवाद को खत्म कर फिर से राजनीतिक रूप से एकजुट हो पाएगा या आने वाले चुनाव में परिवार के अलग-अलग सदस्य अलग-अलग राजनीतिक मंचों से एक-दूसरे के सामने खड़े होंगे। यही तय करेगा कि दशकों पुरानी काजी परिवार की सियासी विरासत अब किस दिशा में जाती है।

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