
## जयपुर में तीज माता की शाही सवारी, लोक संस्कृति और शौर्य के दिखे अनोखे रंग
**जयपुर।** राजस्थान की राजधानी जयपुर में हरियाली तीज के मौके पर तीज माता की पारंपरिक शाही सवारी निकाली गई। गुलाबी शहर की सड़कों पर हजारों लोग इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आयोजन को देखने के लिए जुटे। ढोल-नगाड़ों की गूंज, पारंपरिक वेशभूषा और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पूरे शहर को राजस्थान की संस्कृति के रंग में रंग दिया।
तीज माता की शाही सवारी जब त्रिपोलिया गेट पहुंची तो माहौल और भी भव्य हो गया। जयपुर के पूर्व राजघराने के सदस्य पद्मनाभ सिंह ने पारंपरिक तरीके से तीज माता की आरती की। ऐतिहासिक इमारतों और झरोखों के बीच हुई इस आरती को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
शाही सवारी में बाड़मेर से आए लोक कलाकारों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। कुछ कलाकार करीब **25 किलो वजनी पगड़ी** पहनकर सवारी में शामिल हुए। इतनी भारी पगड़ी के बावजूद कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते नजर आए।
इसके बाद चरी नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को आकर्षित किया। कलाकार सिर पर मटके रखकर लयबद्ध तरीके से नृत्य करते दिखाई दिए। सवारी में कच्छी घोड़ी, गैर, कालबेलिया, चंग-ढप और घूमर जैसी राजस्थान की प्रसिद्ध लोक कलाओं की प्रस्तुतियां भी हुईं। हर प्रस्तुति के साथ राजस्थान की अलग-अलग सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिली।
राजस्थान की प्रसिद्ध कठपुतली कला को भी शाही सवारी में जगह मिली। रंग-बिरंगी कठपुतलियों की प्रस्तुति बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए आकर्षण का केंद्र रही। गुलाबी साफा पहने कलाकारों ने फड़ गायन के जरिए पाबूजी और देवनारायण जैसे लोकदेवताओं से जुड़ी गाथाओं को प्रस्तुत किया।
आस्था और लोक संस्कृति के साथ शाही सवारी में शौर्य का प्रदर्शन भी देखने को मिला। शौर्य सेवा संगठन की बालिकाओं ने तलवारबाजी के करतब दिखाए। हाथों में तलवार लेकर बालिकाओं ने अपनी कला और फुर्ती का प्रदर्शन किया, जिसे देखने के लिए मौजूद लोगों ने उत्साह दिखाया।
इस बार शाही सवारी में करीब **175 लोक कलाकारों** ने हिस्सा लिया। घोड़ों और ऊंटों की संख्या भी बढ़ाई गई थी। आयोजन का एक खास आकर्षण ड्रोन से की गई पुष्पवर्षा रही। एक तरफ लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां दे रहे थे और दूसरी तरफ आसमान से फूल बरसाए जा रहे थे। इससे पारंपरिक आयोजन में आधुनिक तकनीक की भी झलक दिखाई दी।
जो लोग त्रिपोलिया गेट या सवारी मार्ग तक नहीं पहुंच सके, उनके लिए शहर के **13 प्रमुख स्थानों पर LED स्क्रीन** लगाकर शाही सवारी का लाइव प्रसारण किया गया। इनमें छोटी चौपड़, अजमेरी गेट, न्यू गेट, मोती डूंगरी, रामबाग सर्किल, एसएमएस स्टेडियम, बिड़ला मंदिर और जवाहर सर्किल जैसे स्थान शामिल थे।
तीज माता की यह शाही सवारी केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रही। इसमें राजस्थान की राजसी परंपरा, लोक संगीत, घूमर, कालबेलिया, कठपुतली, फड़ गायन, पारंपरिक पगड़ी और तलवारबाजी जैसी कई सांस्कृतिक विरासतें एक साथ देखने को मिलीं। कुछ घंटों के लिए जयपुर की सड़कें राजस्थान की जीवंत सांस्कृतिक झांकी में बदल गईं।



