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रूसी तेल पर भारत का बड़ा बयान, हरदीप पुरी बोले- बिना हिचकिचाहट उठाया सस्ते तेल का फायदा

रूसी कच्चे तेल पर भारत ने उठाया छूट का फायदा, अमेरिकी दबाव के बीच सस्ती ऊर्जा खरीद पर हरदीप पुरी का बड़ा बयान

# रूसी तेल पर भारत का बड़ा बयान, हरदीप पुरी बोले- बिना हिचकिचाहट उठाया सस्ते तेल का फायदा

**नई दिल्ली:** केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने रूसी कच्चे तेल की खरीद को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत ने बिना किसी हिचकिचाहट के कच्चे तेल पर मिल रही छूट का फायदा उठाया और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सस्ता तेल खरीदा। उनके मुताबिक, भारत ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध अवसरों का इस्तेमाल करते हुए अपने हितों को प्राथमिकता दी है।

हरदीप पुरी ने यह बयान 27 अक्टूबर 2026 को गोवा में आयोजित 29वें एनर्जी टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन मीट (ETM 2026) के दौरान दिया। उनके बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव की चर्चाएं होती रही हैं।

## सस्ते रूसी तेल का फायदा उठाने पर क्या बोले हरदीप पुरी?

हरदीप पुरी ने कहा कि भारत ने कच्चे तेल की खरीद के मामले में उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल किया और जहां बेहतर कीमत मिली, वहां से तेल खरीदने के अवसर का लाभ उठाया। उन्होंने संकेत दिया कि ऊर्जा खरीद से जुड़े फैसले देश की जरूरतों और आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं।

भारत दुनिया के प्रमुख कच्चा तेल आयातक देशों में शामिल है। देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करना पड़ता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में होने वाला बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था, ईंधन की लागत और महंगाई पर असर डाल सकता है।

रूसी कच्चे तेल पर मिलने वाली छूट ने भारतीय तेल कंपनियों को खरीद की लागत कम करने का अवसर दिया। भारत ने इस दौरान अलग-अलग देशों से तेल खरीदने की अपनी रणनीति के तहत उपलब्ध विकल्पों का इस्तेमाल किया।

## अमेरिकी दबाव और रूसी तेल की खरीद का मुद्दा

भारत की ओर से रूसी कच्चे तेल की खरीद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस के ऊर्जा कारोबार पर कई तरह के प्रतिबंध और मूल्य संबंधी व्यवस्थाएं लागू की थीं। इसके बाद वैश्विक तेल व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की दिशा में बदलाव देखने को मिला।

इसी बीच भारत की रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका की ओर से दबाव बनाए जाने की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। हरदीप पुरी का ताजा बयान इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है।

भारत का पक्ष रहा है कि ऊर्जा खरीद के फैसले देश की जरूरतों, उपलब्धता और आर्थिक हितों के आधार पर किए जाते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आयात बिल पर पड़ सकता है, इसलिए सस्ती ऊर्जा की उपलब्धता भारत के लिए महत्वपूर्ण है।

## यूरोप के प्राइस कैप का भी किया जिक्र

हरदीप पुरी ने यूरोपीय देशों की ओर से रूसी तेल पर लागू प्राइस कैप का भी जिक्र किया। प्राइस कैप का उद्देश्य निर्धारित सीमा से अधिक कीमत पर रूसी तेल के व्यापार को सीमित करना और रूस की ऊर्जा से होने वाली आय पर दबाव बनाना था।

इस व्यवस्था के तहत तेल व्यापार से जुड़ी कुछ सेवाओं के इस्तेमाल के लिए कीमत संबंधी शर्तें लागू की गईं। हालांकि, इसका प्रभाव संबंधित प्रतिबंधों, व्यापारिक व्यवस्थाओं और समय-समय पर लागू नियमों पर निर्भर करता है।

पुरी ने इस व्यवस्था के संदर्भ में कहा कि अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों और व्यापारिक नियमों का अपना महत्व है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए इन परिस्थितियों को समझना और अपने हितों के अनुसार खरीद के फैसले करना जरूरी है।

## भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है सस्ता कच्चा तेल?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। इसका असर चालू खाते के संतुलन, रुपये की विनिमय दर और घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतें पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की लागत को प्रभावित करती हैं। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का असर घरेलू ईंधन की कीमतों पर किस हद तक पड़ेगा, यह कई दूसरे कारकों पर भी निर्भर करता है।

रूसी तेल पर मिलने वाली छूट से भारतीय तेल कंपनियों को लागत के स्तर पर फायदा मिल सकता है। लेकिन वास्तविक लाभ का आकलन करने के लिए खरीद मूल्य के साथ परिवहन, बीमा, भुगतान और अन्य खर्चों को भी ध्यान में रखना पड़ता है।

## ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा भारत

भारत की ऊर्जा नीति में आपूर्ति की निरंतरता, किफायती कीमत और अलग-अलग स्रोतों से तेल खरीदने की क्षमता महत्वपूर्ण मानी जाती है। किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता से बचने के लिए भारत विभिन्न देशों से ऊर्जा आयात के विकल्प बनाए रखता है।

रूसी कच्चे तेल की खरीद भी इसी व्यापक ऊर्जा व्यापार के संदर्भ में महत्वपूर्ण रही है। भारत के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, व्यापारिक नियमों और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाए रखे।

हरदीप पुरी के बयान से यह संकेत मिलता है कि सरकार ऊर्जा खरीद के मामले में देश के आर्थिक हितों और उपलब्ध अवसरों को महत्व देती है।

## आगे क्या होगा?

रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत की रणनीति पर अंतरराष्ट्रीय बाजार, तेल की कीमतों, प्रतिबंधों और प्रमुख देशों के बीच संबंधों का असर पड़ सकता है। आने वाले समय में भारत की ऊर्जा खरीद किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह इन परिस्थितियों और घरेलू जरूरतों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल हरदीप पुरी का बयान भारत की ऊर्जा खरीद नीति और सस्ते कच्चे तेल के महत्व को लेकर चर्चा में है। भारत के लिए किफायती ऊर्जा हासिल करना आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, वहीं अंतरराष्ट्रीय नियमों और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप फैसले लेना भी उतना ही जरूरी रहेगा।

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