राजस्थान: 39 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, खुले बोरवेल में गिरे 9 साल के भोमाराम की मौत
राजस्थान के जोधपुर में खुले बोरवेल में गिरे 9 साल के भोमाराम को बचाने के लिए करीब 39 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। लगभग 1050 फीट गहरे बोरवेल में करीब 640 फीट नीचे फंसे बच्चे को शुक्रवार देर रात बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।

# राजस्थान: 39 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, खुले बोरवेल में गिरे 9 साल के भोमाराम की मौत
**राजस्थान के जोधपुर क्षेत्र में खुले बोरवेल में गिरे 9 साल के भोमाराम को बचाने की कोशिश नाकाम रही। करीब 39 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शुक्रवार देर रात बच्चे को बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। बच्चा खेत में खेलते समय बोरवेल में गिर गया था।**
## खेलते समय खुले बोरवेल में गिरा बच्चा
राजस्थान में बोरवेल हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। 9 साल का भोमाराम 15 अक्टूबर को दोपहर करीब एक बजे खेत में खेल रहा था। इसी दौरान वह वहां मौजूद खुले बोरवेल में गिर गया।
बताया गया कि घटना के समय बच्चे के पिता पचाराम खेत में खराब पानी के पंप की मरम्मत से जुड़े काम में लगे हुए थे। बच्चे के बोरवेल में गिरने की सूचना मिलने के बाद उसे बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान शुरू किया गया।
## 1050 फीट गहरा था बोरवेल
जानकारी के मुताबिक, बोरवेल की कुल गहराई करीब 1050 फीट थी। भोमाराम लगभग 640 फीट की गहराई में फंसा हुआ था। इतनी गहराई में बच्चे तक पहुंचना बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
रेस्क्यू टीमों को अभियान के दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। बोरवेल के अंदर फंसा पत्थर भी बचाव कार्य में बाधा बना। बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए लगातार प्रयास किए गए।
## करीब 39 घंटे तक चला बचाव अभियान
हादसे के बाद बच्चे को बचाने के लिए करीब 39 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। बचाव दल ने उसे बाहर निकालने की पूरी कोशिश की। लंबी मशक्कत के बाद शुक्रवार देर रात भोमाराम को बोरवेल से बाहर निकाला गया।
हालांकि, बच्चे को बचाया नहीं जा सका। लंबे समय तक चले अभियान के बावजूद उसकी मौत हो गई। इस खबर से परिवार में शोक छा गया।
## खुले बोरवेल से फिर सामने आया खतरा
यह हादसा खुले और असुरक्षित बोरवेल से होने वाले जोखिम को एक बार फिर सामने लाता है। खेतों और अन्य स्थानों पर इस्तेमाल के बाद खुले छोड़े गए बोरवेल बच्चों और आसपास के लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
भोमाराम की मौत ने परिवार और क्षेत्र के लोगों को गहरे दुख में डाल दिया है। करीब 39 घंटे तक चली बचाव की कोशिशों के बाद भी बच्चे की जान नहीं बच सकी।


