मुजफ्फरनगर दंगा मामले में कोर्ट का फैसला, 25 आरोपियों के खिलाफ केस वापसी की मंजूरी
In the 2013 case, the special MP-MLA court allowed the withdrawal of the case following the prosecution's application.

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर दंगों से जुड़े साल 2013 के एक मामले में विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने 25 बीजेपी नेताओं और हिंदू कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमा वापस लेने की अनुमति दे दी है। कोर्ट का यह फैसला अभियोजन पक्ष की ओर से दाखिल की गई अर्जी पर आया है।
अभियोजन अधिकारी राहुल सिंह के मुताबिक, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश देवेंद्र कुमार फौजदार ने बुधवार को अभियोजन की याचिका पर सुनवाई करते हुए केस वापस लेने की अनुमति प्रदान की।
यह मामला वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर में हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ा हुआ है। इस मामले में कई बीजेपी नेताओं और हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोपियों में विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े कुछ कार्यकर्ता भी शामिल बताए गए हैं।
अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में केस वापसी को लेकर आवेदन दिया गया था। सुनवाई के बाद अदालत ने कानूनी प्रक्रिया के तहत अभियोजन की मांग को स्वीकार कर लिया।
कोर्ट के आदेश के बाद अब इन 25 आरोपियों के खिलाफ चल रही इस मामले की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ेगी। हालांकि, अन्य मामलों और संबंधित मुकदमों की स्थिति अलग हो सकती है।
गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर दंगे वर्ष 2013 में हुए थे, जिनके बाद कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। इन मामलों में लंबे समय से अदालतों में सुनवाई चल रही थी। सरकार की ओर से समय-समय पर कुछ मामलों को वापस लेने के लिए आवेदन दिए गए हैं, जिन पर अदालतें कानूनी प्रक्रिया के तहत फैसला करती रही हैं।
फिलहाल विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट के इस आदेश के बाद 25 बीजेपी नेताओं और हिंदू कार्यकर्ताओं को बड़ी राहत मिली है।



