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नेपाल बाढ़ के बीच चीन ने खोला ग्यिरोंग सीमा मार्ग, राहत और बचाव अभियान में आएगी तेजी

विनाशकारी बाढ़ के करीब एक हफ्ते बाद जी-216 हाईवे फिर खुला, भारी मशीनों और खोज उपकरणों से लैस टीमें मौके पर तैनात

नेपाल बाढ़ के बीच चीन ने खोला ग्यिरोंग सीमा मार्ग, बचाव अभियान में तेजी

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बीच चीन ने ग्यिरोंग सीमा चौकी तक जाने वाले एकमात्र सड़क मार्ग को फिर से खोल दिया है। करीब एक सप्ताह पहले आई भीषण बाढ़ के कारण जी-216 मार्ग का एक हिस्सा बुरी तरह प्रभावित हो गया था, जिसके चलते राहत और बचाव कार्यों के लिए चीन को वैकल्पिक तरीकों का सहारा लेना पड़ रहा था। सड़क संपर्क बहाल होने के बाद अब बचाव दलों और भारी मशीनों को प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने में तेजी आने की उम्मीद है।

ग्यिरोंग सीमा चौकी नेपाल और चीन के बीच महत्वपूर्ण संपर्क बिंदुओं में से एक है। पहाड़ी और दुर्गम इलाके में बाढ़ के बाद सड़क मार्ग का बंद होना राहत एवं बचाव अभियान के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। सड़क बंद होने के कारण जरूरी उपकरणों और राहत सामग्री को हवाई मार्ग से प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाया जा रहा था।

हवाई मार्ग से पहुंचाई जा रही थी राहत सामग्री

सड़क मार्ग के बाधित होने के बाद चीन को राहत और बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरणों को हवाई मार्ग से छोड़ना पड़ रहा था। प्रभावित और दुर्गम इलाकों तक पहुंचने के लिए कई बचावकर्मियों ने पहाड़ी रास्तों से पैदल सफर भी किया।

ऐसे हालात में सड़क का दोबारा खुलना बचाव अभियान के लिए अहम माना जा रहा है। अब भारी मशीनरी और जरूरी खोज उपकरणों को सड़क के जरिए प्रभावित क्षेत्र के करीब ले जाना संभव हो गया है। इससे उन इलाकों में अभियान चलाने में मदद मिल सकती है, जहां बाढ़ और मलबे के कारण पहुंचना मुश्किल बना हुआ है।

एक्स्केवेटर और खोजी दल मौके पर तैनात

चीन के सरकारी चैनल सीसीटीवी ने बचाव अभियान से जुड़ी तस्वीरें जारी की हैं। इनमें बचाव दलों के साथ एक्स्केवेटर और अन्य भारी मशीनें दिखाई गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में जीवन की तलाश के लिए विशेष उपकरणों से लैस टीमें तैनात की गई हैं।

इन टीमों में खोजी कुत्ते भी शामिल हैं। ऐसे खोजी कुत्तों और जीवन खोजने वाले उपकरणों का इस्तेमाल मलबे में फंसे या लापता लोगों की तलाश के लिए किया जा रहा है। बाढ़ के बाद कई स्थानों पर मलबा जमा होने से बचाव अभियान जटिल हो गया है। ऐसे में तकनीकी उपकरणों और प्रशिक्षित टीमों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

लगातार बारिश ने बढ़ाई चुनौती

सड़क मार्ग खुलने के बावजूद बचावकर्मियों के सामने चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। पहाड़ी इलाके में लगातार बारिश और तेज बहती नदी राहत एवं बचाव अभियान को मुश्किल बना रही है। संकरी घाटियों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण भारी मशीनों को भी सावधानी से आगे बढ़ाना पड़ रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, ऊपर की झीलों से अचानक और अधिक बाढ़ आने का खतरा पहले की तुलना में कम हुआ है। हालांकि, इलाके में भूस्खलन का जोखिम अभी भी बना हुआ है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ों की मिट्टी कमजोर होने और रास्तों पर मलबा आने की आशंका बनी रहती है।

ऐसे में बचाव दलों को मौसम और नदी के बहाव पर लगातार नजर रखनी पड़ रही है। किसी भी नए भूस्खलन या जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी से अभियान प्रभावित हो सकता है।

तिब्बत में जानकारी को लेकर भी सवाल

तिब्बत में आई आपदा से जुड़ी ज्यादातर जानकारी चीन के राज्य-नियंत्रित मीडिया के माध्यम से सामने आ रही है। आपदा प्रभावित क्षेत्र की परिस्थितियों की स्वतंत्र जानकारी जुटाना भी आसान नहीं है।

मंगलवार को विदेशी पत्रकारों को आपदा क्षेत्र में जाने की अनुमति नहीं मिलने की जानकारी सामने आई थी। ऐसे में प्रभावित इलाकों में वास्तविक स्थिति, नुकसान की व्यापकता और बचाव अभियान की प्रगति को लेकर उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से आधिकारिक चीनी माध्यमों पर निर्भर है।

आपदा के दौरान पारदर्शी और समय पर जानकारी बेहद महत्वपूर्ण होती है, खासकर तब जब प्रभावित क्षेत्र पहाड़ी और सीमावर्ती इलाका हो। इससे राहत एजेंसियों, स्थानीय प्रशासन और प्रभावित लोगों तक जरूरी सहायता पहुंचाने में मदद मिलती है।

नेपाल में भी बाढ़ ने मचाई भारी तबाही

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और फ्लैश फ्लड ने पहाड़ी इलाकों की संवेदनशीलता को एक बार फिर सामने ला दिया है। भारी बारिश, तेज बहाव वाली नदियां, भूस्खलन और अचानक आने वाली बाढ़ पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर नुकसान का कारण बन सकती हैं।

नेपाल में भारी जनहानि और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की खबरों ने इस आपदा की गंभीरता को उजागर किया है। कई स्थानों पर सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने से संपर्क व्यवस्था प्रभावित हुई है। ऐसे में राहत टीमों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

चीन की तरफ ग्यिरोंग सीमा मार्ग का दोबारा खुलना ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे सीमा क्षेत्र में राहत और बचाव अभियान के लिए जरूरी संसाधनों की आवाजाही आसान होगी।

मौसम निगरानी और शुरुआती चेतावनी जरूरी

नेपाल और चीन के पहाड़ी सीमावर्ती इलाकों में इस तरह की आपदाओं को देखते हुए मौसम निगरानी और शुरुआती चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम तेजी से बदल सकता है और भारी बारिश के साथ अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने या भूस्खलन जैसी घटनाएं हो सकती हैं।

Chinese rescue personnel carrying supplies and equipment enter the core disaster area through a newly opened land route at Gyirong Port in Gyirong County, in China’s western Tibet Autonomous Region on September 2, 2026. (Photo by CNS / AFP) / China OUT

बेहतर मौसम निगरानी से संभावित खतरे की पहले जानकारी मिल सकती है। इससे स्थानीय प्रशासन को लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और बचाव दलों को पहले से तैयार करने में मदद मिल सकती है।

सड़क खुलने से अभियान को मिलेगी गति

ग्यिरोंग सीमा सड़क के फिर से खुलने से चीन की तरफ चल रहे राहत और बचाव अभियान को महत्वपूर्ण मदद मिलने की उम्मीद है। भारी मशीनें, खोज उपकरण और प्रशिक्षित बचाव दल अब प्रभावित क्षेत्रों के करीब पहुंच सकते हैं।

हालांकि, लगातार बारिश, संकरी घाटियां, तेज बहती नदियां और भूस्खलन का खतरा अभी भी अभियान के सामने बड़ी चुनौती हैं। इसलिए सड़क संपर्क बहाल होने के बावजूद बचाव कार्य पूरी तरह सुरक्षित परिस्थितियों में नहीं है।

फिलहाल प्राथमिकता प्रभावित इलाकों में फंसे या लापता लोगों की तलाश, राहत सामग्री पहुंचाने और आगे होने वाले नुकसान को रोकने की है। ग्यिरोंग मार्ग की बहाली से संसाधनों की आवाजाही बेहतर होने के साथ इस अभियान को गति मिलने की उम्मीद है।

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