विदेश

नेतन्याहू को कतर-हमास फंडिंग की चेतावनी? नई रिपोर्ट से इजरायल में बढ़ा विवाद

रिपोर्ट में दावा, नेतन्याहू को कतर से हमास के सैन्य विंग तक पहुंचने वाली फंडिंग को लेकर पहले ही चेतावनी दी गई थी

**नेतन्याहू को कतर-हमास फंडिंग की चेतावनी? नई रिपोर्ट से इजरायल में बढ़ा विवाद**

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कतर से गाजा पहुंचने वाली रकम के हमास के सैन्य ढांचे तक पहुंचने को लेकर पहले से चेतावनी दिए जाने का दावा एक नई जांच रिपोर्ट में किया गया है। इजरायली अखबार *येदिओथ अहरोनोथ* की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली खुफिया एजेंसियों के आकलन में कतर से आने वाली रकम का एक हिस्सा हमास के सैन्य विंग तक पहुंचने की बात कही गई थी। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि यह रकम हमास के सैन्य संगठन के कुल बजट के लगभग आधे तक हो सकती थी।

रिपोर्ट सामने आने के बाद इजरायल की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं ने नेतन्याहू सरकार से सवाल पूछे हैं कि अगर सुरक्षा एजेंसियों की ओर से इस तरह की चेतावनी दी गई थी, तो उस समय इस फंडिंग व्यवस्था को लेकर क्या कदम उठाए गए थे। हालांकि, नेतन्याहू के कार्यालय ने रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को खारिज किया है।

### नेतन्याहू को चेतावनी दिए जाने का दावा

*येदिओथ अहरोनोथ* की जांच के मुताबिक, इजरायली सुरक्षा प्रतिष्ठान की ओर से नेतन्याहू को कई बार बताया गया था कि कतर से गाजा के लिए आने वाली रकम का इस्तेमाल हमास के सैन्य ढांचे को मजबूत करने में हो सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मिस्र की ओर से भी नेतन्याहू को इसी तरह की चेतावनी दी गई थी।

यह दावा पूरी तरह नया नहीं है। मार्च 2025 में भी इजरायली मीडिया में रिपोर्ट सामने आई थीं कि 2019 और 2020 में नेतन्याहू को चेतावनी दी गई थी कि कतर से गाजा पहुंचने वाली रकम का कुछ हिस्सा हमास के तत्कालीन सैन्य प्रमुख मोहम्मद दीफ तक पहुंच रहा है। उस समय नेतन्याहू कार्यालय ने इन रिपोर्टों से असहमति जताई थी।

### खुफिया आकलन में क्या कहा गया?

नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायली खुफिया अधिकारियों ने कतर से आने वाले धन और हमास के सैन्य संगठन के बीच संबंध को लेकर गंभीर आकलन किया था। रिपोर्ट के अनुसार, आकलन में यह रकम हमास के सैन्य विंग के कुल बजट के करीब आधे हिस्से तक बताई गई थी।

इसके अलावा, इजरायली खुफिया एजेंसियों को कथित तौर पर एक अलग और गुप्त वित्तीय चैनल की जानकारी भी मिली थी, जिसके जरिए कतर से जुड़े स्रोतों का पैसा सीधे हमास की सशस्त्र शाखा तक पहुंचने की बात कही गई। *टाइम्स ऑफ इजरायल* ने भी नई जांच रिपोर्ट के हवाले से इस दावे को रिपोर्ट किया है।

### कतर ने आरोपों को किया खारिज

इन आरोपों पर कतर ने स्पष्ट रूप से इनकार किया है। कतर के इंटरनेशनल मीडिया ऑफिस ने 18 सितंबर 2026 को जारी बयान में कहा कि कतर ने हमास को पैसा नहीं दिया। कतर के मुताबिक, उसकी सहायता गाजा के आम फिलिस्तीनी नागरिकों के लिए थी और यह सहायता इजरायली अधिकारियों तथा अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के साथ समन्वय में पहुंचाई जाती थी।

कतर ने यह भी कहा कि अगर किसी अन्य माध्यम से कोई धन हमास तक पहुंचा, तो उसका कतर से संबंध नहीं था। कतर के बयान में इन आरोपों को इजरायल की घरेलू राजनीति से जोड़ने का भी दावा किया गया है।

### नेतन्याहू कार्यालय का क्या कहना है?

नेतन्याहू के प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी नई रिपोर्ट को खारिज किया है। *जेरूसलम पोस्ट* के अनुसार, कार्यालय ने रिपोर्ट को पहले सामने आ चुके आरोपों का दोहराव बताया और कहा कि कतर से जुड़ी सहायता व्यवस्था को लेकर सुरक्षा प्रतिष्ठान की भूमिका और पिछली सरकारों के फैसलों को भी ध्यान में रखना चाहिए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह भी दावा किया कि 2021 में गाजा में सैन्य संघर्ष के बाद नेतन्याहू ने कतर की सहायता रोकने के निर्देश दिए थे।

इस तरह इस पूरे मामले में तीन अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं—इजरायली मीडिया की जांच रिपोर्ट, नेतन्याहू कार्यालय का खंडन और कतर का यह दावा कि उसकी सहायता हमास के सैन्य संगठन के लिए नहीं थी।

### पुरानी कतर फंडिंग व्यवस्था फिर चर्चा में

कतर की ओर से गाजा को दी जाने वाली आर्थिक सहायता लंबे समय से विवाद का विषय रही है। रिपोर्टों के अनुसार, 2018 से कतर ने गाजा में ईंधन, सरकारी कर्मचारियों और जरूरतमंद परिवारों के लिए सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था में भूमिका निभाई थी। नेतन्याहू की सरकारों के दौरान भी इस व्यवस्था को आगे बढ़ाया गया था।

2023 में 7 अक्टूबर के हमास हमले के बाद इस नीति की इजरायल में दोबारा समीक्षा शुरू हुई। आलोचकों का सवाल रहा है कि गाजा में आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से शुरू की गई व्यवस्था का कहीं अप्रत्यक्ष रूप से हमास के सैन्य ढांचे को फायदा तो नहीं हुआ।

नई रिपोर्ट ने इसी पुराने विवाद को फिर से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, रिपोर्ट में किए गए दावों और उनके आधार को लेकर नेतन्याहू कार्यालय तथा कतर दोनों ने आपत्ति जताई है। इसलिए इस मामले में सामने आई जानकारियों को आरोप और रिपोर्ट किए गए दावों के रूप में देखना जरूरी है, न कि अंतिम रूप से स्थापित तथ्य के तौर पर।

### जांच और राजनीतिक बहस तेज

नई रिपोर्ट के बाद इजरायल में अक्टूबर 2023 के हमले से पहले की सुरक्षा और नीतिगत फैसलों को लेकर बहस फिर तेज हो गई है। विपक्षी नेता इन रिपोर्टों का हवाला देकर नेतन्याहू सरकार से जवाब मांग रहे हैं, जबकि प्रधानमंत्री कार्यालय रिपोर्ट की विश्वसनीयता और उसके राजनीतिक संदर्भ पर सवाल उठा रहा है।

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कतर से गाजा को दी जाने वाली सहायता को लेकर इजरायल की सुरक्षा एजेंसियों, राजनीतिक नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय पक्षों की भूमिका पहले से ही चर्चा में रही है। ऐसे में नई जांच रिपोर्ट आने के बाद पुराने फैसलों और चेतावनियों की दोबारा समीक्षा की मांग उठ रही है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button