निर्मला सीतारमण का अखिलेश यादव पर हमला, यूपीए सरकार के बैंकिंग संकट और फोन बैंकिंग को लेकर उठाए सवाल
निर्मला सीतारमण ने अखिलेश यादव को घेरा, यूपीए सरकार के दौरान बैंकों की बदहाली और फोन बैंकिंग का लगाया आरोप, मोदी सरकार के बैंकिंग सुधारों का किया बचाव

# निर्मला सीतारमण का अखिलेश यादव पर हमला, यूपीए सरकार के बैंकिंग संकट और फोन बैंकिंग को लेकर उठाए सवाल
**नई दिल्ली:** केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए यूपीए सरकार के कार्यकाल में बैंकों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के दौरान फोन बैंकिंग और क्रोनी कैपिटलिज्म के कारण सरकारी बैंकों को नुकसान पहुंचा। वित्त मंत्री ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
यह बयान अखिलेश यादव की उस टिप्पणी के बाद आया है, जिसमें उन्होंने आईडीबीआई बैंक से जुड़े सौदे और सरकारी संपत्तियों की बिक्री को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा था।
## निर्मला सीतारमण ने अखिलेश यादव को क्यों घेरा?
निर्मला सीतारमण ने अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा कि वर्ष 2004 से समाजवादी पार्टी का समर्थन यूपीए सरकार को प्राप्त था। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यूपीए सरकार के कार्यकाल में बैंकों की स्थिति खराब थी, तब अखिलेश यादव ने अपने सहयोगी दलों से सवाल क्यों नहीं किए।
वित्त मंत्री ने अपने बयान में कहा कि उस समय बैंकों को जिस स्थिति में छोड़ा गया था, उसे देखते हुए अब बैंकिंग व्यवस्था को लेकर सवाल उठाना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, विपक्षी दलों को अपने पुराने राजनीतिक समर्थन और उस समय की नीतियों पर भी जवाब देना चाहिए।
## फोन बैंकिंग और क्रोनी कैपिटलिज्म का लगाया आरोप
वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार के दौरान फोन बैंकिंग और क्रोनी कैपिटलिज्म के जरिए सरकारी बैंकों को नुकसान पहुंचा। फोन बैंकिंग का इस्तेमाल उस स्थिति के लिए किया जाता है, जब प्रभावशाली लोगों की सिफारिश या दबाव के आधार पर बैंकों को कर्ज देने के लिए कहा जाता है। वहीं, क्रोनी कैपिटलिज्म का अर्थ राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों और कारोबारियों को अनुचित लाभ मिलने से है।
निर्मला सीतारमण ने विशेष रूप से आईडीबीआई बैंक का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में दिए गए कुछ कर्जों की मूल राशि और ब्याज की वसूली के लिए आज भी प्रयास किए जा रहे हैं। ये वित्त मंत्री के आरोप हैं, जिनके जरिए उन्होंने यूपीए सरकार के बैंकिंग प्रबंधन पर सवाल उठाए।
## NDA सरकार ने बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत किया: वित्त मंत्री
निर्मला सीतारमण ने दावा किया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने पारदर्शी नीतियों और पूंजी निवेश के माध्यम से बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से आईडीबीआई बैंक समेत बैंकिंग व्यवस्था की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है।
वित्त मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब बैंकों की स्थिति मजबूत करने के लिए कदम उठाए जा चुके हैं, तब विपक्ष की ओर से चिंता जताने का क्या औचित्य है। उन्होंने अखिलेश यादव की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘घड़ियाली आंसू’ बताया।
## अखिलेश यादव ने क्या कहा था?
इससे पहले अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर सरकारी संपत्तियों को बेचने की योजना बनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि ऐसा लग रहा है कि सरकार अपनी दुकान बंद करने से पहले सब कुछ बेच देना चाहती है। उन्होंने इस स्थिति की तुलना दुकान पर लगे ‘सीजन एंड सेल’ के बोर्ड से की।
अखिलेश यादव की यह टिप्पणी आईडीबीआई बैंक से जुड़े सौदे के संदर्भ में आई थी। इसके बाद निर्मला सीतारमण ने यूपीए सरकार के दौरान बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति और समाजवादी पार्टी के राजनीतिक समर्थन को लेकर सवाल उठाए।
## बैंकिंग क्षेत्र को लेकर तेज हुई सियासी बयानबाजी
आईडीबीआई बैंक और सरकारी संपत्तियों से जुड़े मुद्दे पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर अखिलेश यादव ने सरकारी संपत्तियों की बिक्री को लेकर केंद्र पर सवाल उठाए हैं, वहीं दूसरी ओर निर्मला सीतारमण ने यूपीए सरकार के कार्यकाल में बैंकों की स्थिति का मुद्दा उठाकर विपक्ष को घेरा है।
फिलहाल, इस मामले में दोनों नेताओं के बयान राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं। बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े आरोपों और सरकारी नीतियों को लेकर आगे भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।



