नाना पाटेकर ने NIT छात्रों को दिया था बड़ा संदेश, बोले- ‘डिग्री लेकर समाज को लौटाना सीखो’
नाना पाटेकर के निधन के बाद NIT अगरतला के 2016 दीक्षांत समारोह का उनका पुराना भाषण फिर चर्चा में, छात्रों से कहा था- जनता के टैक्स से पढ़े हो, समाज को लौटाना सीखो

**नाना पाटेकर का वो संदेश जो आज फिर चर्चा में है, NIT छात्रों से बोले थे- डिग्री सिर्फ शुरुआत है**
मुंबई। दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 8 अक्टूबर 2026 को गोवा स्थित उनके आवास पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिए जाने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर के बाद फिल्म जगत के साथ-साथ देशभर में उनके चाहने वालों के बीच शोक की लहर है।
नाना पाटेकर अपने बेबाक अंदाज, दमदार आवाज और संजीदा अभिनय के लिए जाने जाते थे। अभिनय के अलावा वह सामाजिक मुद्दों पर भी खुलकर अपनी बात रखते थे। उनके निधन के बाद उनका करीब एक दशक पुराना एक भाषण भी चर्चा में आ गया है, जो उन्होंने नवंबर 2016 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) अगरतला के 9वें दीक्षांत समारोह में दिया था।
### NIT छात्रों से बोले थे- डिग्री सिर्फ शुरुआत है
दीक्षांत समारोह में नाना पाटेकर ने छात्रों से कहा था कि डिग्री हासिल करना उनकी यात्रा का अंत नहीं बल्कि शुरुआत है। उन्होंने युवाओं से अपील की थी कि वे अपने करियर का चुनाव जिम्मेदारी के साथ करें और देशहित को प्राथमिकता दें।
उन्होंने छात्रों को जीवन में ईमानदारी और मूल्यों से समझौता नहीं करने की सलाह दी थी। नाना ने कहा था कि व्यक्ति को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे उसे अपने ही सामने शर्मिंदगी महसूस हो। उन्होंने काम को पूजा के समान बताते हुए संयम और सादगी के साथ जीवन जीने की बात कही थी।
### ‘समाज को लौटाना सीखो’
नाना पाटेकर ने NIT जैसे संस्थानों से पढ़ाई करने वाले छात्रों को यह भी याद दिलाया था कि उनकी शिक्षा में जनता के पैसे का योगदान होता है। ऐसे में उन्होंने युवाओं से समाज और देश के लिए कुछ वापस करने की जिम्मेदारी निभाने की अपील की थी।
उन्होंने छात्रों से कहा था कि केवल अच्छी नौकरी हासिल करना ही जीवन का उद्देश्य नहीं होना चाहिए। युवाओं को लगातार सीखते रहना चाहिए, उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए और अपनी सोच व रचनात्मकता का इस्तेमाल देश और समाज के काम आने वाले नए समाधान तैयार करने में करना चाहिए।
### युवाओं को दिया था राष्ट्र निर्माण का संदेश
नाना पाटेकर का यह संदेश उस समय मौजूद छात्रों और शिक्षकों के बीच काफी सराहा गया था। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में योगदान देने और राष्ट्रीय हित से जुड़े मामलों में समझौता नहीं करने की अपील की थी।
करीब दस साल बाद उनके निधन के मौके पर उनका यह पुराना संदेश फिर सामने आया है। उनके शब्दों में शिक्षा को केवल डिग्री और नौकरी तक सीमित न रखकर समाज के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ने की बात थी।
### 75 साल की उम्र में हुआ निधन
नाना पाटेकर को 8 अक्टूबर की सुबह गोवा स्थित उनके घर पर तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल ले जाया गया था। डॉक्टरों के अनुसार उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी हालत बेहद गंभीर थी। डॉक्टरों ने सीपीआर और अन्य प्रयास किए, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। मौत के बाद मेडिकल प्रक्रिया के तहत उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
नाना पाटेकर ने 1978 में फिल्म **’गमन’** से हिंदी सिनेमा में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने ‘अंकुश’, ‘परिंदा’, ‘अंगार’, ‘क्रांतिवीर’, ‘तिरंगा’, ‘अब तक छप्पन’ और ‘वेलकम’ सहित कई फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। हिंदी के साथ-साथ उन्होंने मराठी सिनेमा और थिएटर में भी अपनी अलग पहचान बनाई।
उनके निधन पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने शोक जताया। नाना पाटेकर की दमदार अदाकारी और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी उनकी आवाज को भारतीय सिनेमा में लंबे समय तक याद किया जाएगा।



