देवास में TI दिलीप पुरी हत्याकांड में बड़ा खुलासा, मुख्य आरोपी राहुल जायसवाल समेत 4 पुलिस हिरासत में
अवैध शराब की अंतरराज्यीय तस्करी रोकने पहुंचे खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी को ट्रक से कुचलकर मार डाला गया था। पुलिस ने तस्करी नेटवर्क के मुख्य आरोपी राहुल जायसवाल समेत चार लोगों को हिरासत में लिया है।

देवास में TI दिलीप पुरी हत्याकांड में बड़ा खुलासा, शराब तस्करी नेटवर्क का मास्टरमाइंड राहुल जायसवाल समेत 4 हिरासत में
मध्य प्रदेश के देवास जिले में अवैध शराब की अंतरराज्यीय तस्करी रोकने पहुंचे खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की ट्रक से कुचलकर हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में अवैध शराब तस्करी नेटवर्क के कथित मुख्य सरगना राहुल जायसवाल समेत चार लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए मध्य प्रदेश से गुजरात तक अवैध शराब की सप्लाई की जा रही थी।
इस घटना के बाद प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार और तस्करी नेटवर्क को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
ट्रक रोकने पहुंचे TI को कुचलकर भागा ड्राइवर
जानकारी के मुताबिक, देवास जिले के खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी को सूचना मिली थी कि हरदा जिले के टिमरनी से अवैध शराब से भरा ट्रक गुजरात की ओर ले जाया जा रहा है। इसके बाद पुलिस टीम ने इंदौर-बैतूल हाईवे पर सांडलपुर फाटा के पास नाकाबंदी की।
रात करीब 1:30 बजे पुलिस को नर्मदा ढाबे के पास एक आयशर वाहन खड़ा दिखाई दिया। थाना प्रभारी दिलीप पुरी जब वाहन की जांच करने और ड्राइवर से पूछताछ करने पहुंचे तो चालक ने कथित तौर पर ट्रक भगाने की कोशिश की।
इस दौरान ट्रक का पिछला पहिया दिलीप पुरी के ऊपर चढ़ गया। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना में आरक्षक सोहन जाट भी घायल हुए। पुलिस ने बाद में ट्रक से करीब 1800 लीटर अवैध शराब बरामद की।
राहुल जायसवाल के हाथ में था तस्करी नेटवर्क का संचालन
पुलिस की जांच में राहुल जायसवाल को इस पूरे अवैध शराब नेटवर्क का कथित मुख्य संचालक बताया गया है। वह हरदा जिले के टिमरनी का रहने वाला है। जांच के मुताबिक, वह तीन शराब दुकानों से अलग-अलग इलाकों में अवैध शराब की सप्लाई का नेटवर्क संभाल रहा था।
पुलिस के अनुसार, अवैध शराब के कारोबार से मिलने वाली रकम पहले राहुल जायसवाल के पास जमा होती थी। इसके बाद वह नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के बीच हिस्सेदारी के हिसाब से पैसे बांटता था।
जांच में शराब कारोबार में राहुल जायसवाल के अलावा मनीष जायसवाल, मोहिन जायसवाल और पाटेन्द्र जायसवाल की हिस्सेदारी की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस इस नेटवर्क के आर्थिक लेनदेन और शराब की सप्लाई से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
ट्रक चालक गजेंद्र उर्फ अक्कु रावत की तलाश
पुलिस के मुताबिक, घटना में इस्तेमाल आयशर वाहन का चालक गजेंद्र उर्फ अक्कु रावत है, जो अलीराजपुर जिले का रहने वाला बताया गया है। उसे केरम सिंह चंगोड़ ने वाहन उपलब्ध कराया था।
जांच में केरम सिंह चंगोड़ और विजय राव के नाम भी सामने आए हैं। विजय राव इंदौर का रहने वाला है और उस पर राहुल जायसवाल के लिए तस्करी नेटवर्क में काम करने का आरोप है।
पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और फरार लोगों की तलाश में अलग-अलग जिलों में दबिश दी जा रही है। ट्रक चालक गजेंद्र उर्फ अक्कु रावत की गिरफ्तारी के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
तीन शराब दुकानों के लाइसेंस निलंबित
इस मामले के सामने आने के बाद आबकारी विभाग ने भी कार्रवाई की है। हरदा जिले में संबंधित शराब दुकानों की जांच की गई और तीन दुकानों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं।
इसके अलावा टिमरनी क्षेत्र में पदस्थ सहायक जिला आबकारी अधिकारी अमर सिंह बघेल और दो आबकारी आरक्षकों को भी निलंबित किया गया है। अधिकारियों की भूमिका और निगरानी में हुई कथित लापरवाही की जांच की जा रही है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी की मौत के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना पर दुख जताया और मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए। जांच की निगरानी के लिए विशेष पुलिस महानिदेशक उपेंद्र जैन को भी घटनास्थल पर भेजा गया।
मुख्यमंत्री ने दिलीप पुरी के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता देने और उनकी पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति के तहत सब-इंस्पेक्टर बनाने की घोषणा की है।
पांच जिलों में पुलिस की टीमें कर रहीं जांच
पुलिस अब इस मामले को केवल एक ट्रक से शराब की तस्करी तक सीमित मानकर नहीं चल रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि अवैध शराब कहां से खरीदी जा रही थी, किन दुकानों से इसकी सप्लाई होती थी और इस कारोबार में किन-किन लोगों की भूमिका थी।
पांच जिलों में पुलिस की टीमें बनाकर छापेमारी की जा रही है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए इनाम भी घोषित किया गया है।
दिलीप पुरी की हत्या ने मध्य प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार और तस्करी नेटवर्क की गंभीरता को उजागर कर दिया है। अब पुलिस की जांच का मुख्य फोकस इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचना और घटना में शामिल सभी आरोपियों को गिरफ्तार करना है।



