दिल्ली में 10 अक्टूबर को CJP का प्रदर्शन, पुलिस से मांगी अनुमति; नई दिल्ली में BNSS की धारा 163 लागू
3 अक्टूबर के प्रदर्शन में महिला पत्रकारों के आरोपों के बाद फिर प्रदर्शन की तैयारी, अनुमति पर दिल्ली पुलिस का फैसला बाकी

**दिल्ली में 10 अक्टूबर को CJP का प्रदर्शन, पुलिस से मांगी अनुमति; नई दिल्ली में BNSS की धारा 163 लागू**
नई दिल्ली। दिल्ली में कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) एक बार फिर प्रदर्शन की तैयारी में है। संगठन ने 10 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर यह प्रदर्शन प्रस्तावित है। संगठन ने बुधवार को दिल्ली पुलिस को प्रदर्शन की जानकारी देते हुए अनुमति मांगी, लेकिन पुलिस की ओर से अनुमति नहीं दिए जाने की बात सामने आई है।
CJP का कहना है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करना चाहता है। संगठन की ओर से चुनाव आयोग और मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। CJP का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता की जरूरत है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
### नई दिल्ली में लागू है BNSS की धारा 163
10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन के बीच नई दिल्ली इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है। इसके तहत बिना पूर्व लिखित अनुमति के पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, जुलूस, प्रदर्शन, धरना और नारेबाजी जैसी गतिविधियों पर रोक है। पुलिस ने पहले भी प्रदर्शनकारियों को इस आदेश का पालन करने की अपील की है।
पुलिस के मुताबिक, धारा 163 लागू किए जाने का उद्देश्य सार्वजनिक सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था बनाए रखना है। नियमों का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
### पुलिस ने CJP को अनुमति नहीं दी
CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस को औपचारिक सूचना दी थी। प्रदर्शन जंतर-मंतर पर प्रस्तावित है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इसके बाद CJP की ओर से पुलिस के अधिकार और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
CJP का कहना है कि उसका प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा और संगठन अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाना चाहता है। वहीं पुलिस की ओर से नई दिल्ली में लागू प्रतिबंधों और कानून-व्यवस्था को देखते हुए अनुमति नहीं दी गई है।
### 3 अक्टूबर के प्रदर्शन में महिला पत्रकारों के आरोप
CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले 3 अक्टूबर को नई दिल्ली इलाके में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान विवाद खड़ा हो गया था। तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। पुलिस ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मामले को क्राइम ब्रांच को जांच के लिए भेज दिया है।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी थी और प्रदर्शनकारियों को मौके से हटने के लिए कहा गया था। पुलिस का कहना है कि इसके बाद भी प्रदर्शन जारी रहने पर कार्रवाई की गई। शिकायत करने वाली महिला पत्रकारों का मेडिकल परीक्षण भी कराया गया और उनके बयान दर्ज किए गए। मामले की जांच के लिए मौके के CCTV फुटेज की भी जांच की जा रही है।
### पहले भी हुए थे प्रदर्शन और गिरफ्तारियां
नई दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने धारा 163 के उल्लंघन और कथित तौर पर अवैध जमावड़े के आरोप में कार्रवाई की। 6 अक्टूबर को दिल्ली की एक अदालत ने ऐसे ही मामले में गिरफ्तार 17 प्रदर्शनकारियों को जमानत दी थी। अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है, हालांकि कानून-व्यवस्था भंग करने या पुलिसकर्मियों के साथ हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े मामलों में FIR भी दर्ज की थीं। इससे पहले जंतर-मंतर और उसके आसपास प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी और बैरिकेडिंग लगाई गई थी।
### 10 अक्टूबर को क्या होगा?
अब सबकी नजर 10 अक्टूबर के प्रस्तावित CJP प्रदर्शन पर है। एक तरफ संगठन अपनी मांगों को लेकर जंतर-मंतर पहुंचने की तैयारी कर रहा है, जबकि दूसरी ओर नई दिल्ली इलाके में धारा 163 लागू होने के कारण पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी है।
ऐसे में 10 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति न बने, इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था पर भी नजर रहेगी। CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई है, जबकि प्रशासन का जोर लागू प्रतिबंधों का पालन कराने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है।

