दिल्ली के प्रीत विहार में बच्चों की रामलीला, राम-सीता से लेकर रावण और हनुमान तक निभा रहे किरदार
दिल्ली के प्रीत विहार में आयोजित रामलीला में स्कूली बच्चे राम, लक्ष्मण, सीता, रावण, हनुमान और जटायु समेत रामायण के कई पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षक बच्चों को संवाद याद कराने, अभिनय और मेकअप की तैयारी में मदद करते हैं। आयोजन का उद्देश्य बच्चों को रामायण के प्रसंगों और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना है।

# दिल्ली के प्रीत विहार में बच्चों की रामलीला, राम-सीता से लेकर रावण और हनुमान तक निभा रहे किरदार
**सबहेडिंग:** दिल्ली के प्रीत विहार में आयोजित रामलीला में स्कूली बच्चे रामायण के प्रमुख पात्रों की भूमिका निभा रहे हैं। शिक्षक ही बच्चों को संवाद याद कराने, अभिनय की तैयारी और मेकअप में मदद करते हैं। इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों को रामायण के प्रसंगों और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना है।
## नई दिल्ली। मंच पर बच्चे निभा रहे रामायण के प्रमुख पात्रों की भूमिका
दिल्ली के प्रीत विहार में आयोजित रामलीला में इन दिनों बच्चों की प्रतिभा देखने को मिल रही है। मंच पर कोई राम बनकर आता है, तो कोई लक्ष्मण, सीता, रावण या हनुमान की भूमिका निभाता है। कुंभकर्ण, मेघनाद, जटायु और ऋषि-मुनियों जैसे पात्रों को भी बच्चे ही जीवंत करते हैं।
इस रामलीला की खास बात यह है कि इसमें बच्चों को केवल पात्रों की वेशभूषा पहनाकर मंच पर नहीं उतारा जाता, बल्कि उन्हें रामायण के प्रसंगों को समझने और संवादों को आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करने के लिए भी तैयार किया जाता है। बच्चों की मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन से मंच पर रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किए जाते हैं।
## संवाद याद करने से लेकर अभिनय तक, बच्चों की खास तैयारी
रामलीला में अभिनय करना बच्चों के लिए एक अनुभव है, लेकिन पात्र के संवाद याद करना और उन्हें दर्शकों के सामने सही भाव के साथ बोलना अपने आप में चुनौती है। प्रीत विहार की रामलीला में बच्चे इस चुनौती को स्वीकार करते हुए अपनी भूमिकाओं की तैयारी करते हैं।
शिक्षक बच्चों को संवादों का अभ्यास कराते हैं और उनके अभिनय को बेहतर बनाने में मदद करते हैं। उन्हें यह भी समझाया जाता है कि किस प्रसंग में किस तरह का भाव दिखाना है और मंच पर अपनी भूमिका कैसे निभानी है।
इस अभ्यास से बच्चों को मंच पर बोलने, दर्शकों के सामने प्रस्तुति देने और समूह में मिलकर काम करने का अवसर मिलता है।
## टीचर ही करते हैं बच्चों का मेकअप और तैयारी
इस रामलीला की एक और खास बात यह है कि बच्चों को तैयार करने के लिए बाहर से मेकअप आर्टिस्ट नहीं बुलाए जाते। स्कूल के शिक्षक ही बच्चों का मेकअप करते हैं और उन्हें पात्रों के अनुरूप तैयार करते हैं।
शिक्षकों की देखरेख में बच्चे अपनी वेशभूषा पहनते हैं, संवाद दोहराते हैं और मंच पर जाने से पहले अपनी भूमिका का अभ्यास करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में शिक्षक बच्चों का मार्गदर्शन करते हैं, ताकि प्रस्तुति व्यवस्थित और प्रभावशाली हो सके।
बच्चों और शिक्षकों की यह सामूहिक मेहनत रामलीला को केवल एक मंचीय कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखती, बल्कि इसे सीखने और सांस्कृतिक परंपराओं को समझने का अवसर भी बनाती है।
## भरत मिलाप से सीता हरण तक, रामायण के प्रसंगों का मंचन
प्रीत विहार की रामलीला में रामायण के कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया जाता है। इनमें भरत मिलाप से लेकर सीता हरण तक की घटनाएं शामिल हैं। बच्चे इन प्रसंगों में अलग-अलग पात्रों की भूमिका निभाकर दर्शकों के सामने कहानी को प्रस्तुत करते हैं।
राम, लक्ष्मण और सीता के प्रसंगों के साथ रावण, हनुमान, जटायु और अन्य पात्रों की भूमिका भी प्रस्तुति का हिस्सा होती है। संवाद, अभिनय और वेशभूषा के माध्यम से बच्चे रामायण की कथा को मंच पर जीवंत करने का प्रयास करते हैं।
इस तरह दर्शकों को रामायण के परिचित प्रसंग देखने को मिलते हैं, जबकि बच्चों को भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक साहित्य से परिचित होने का अवसर मिलता है।
## कई साल से जारी है प्रीत विहार की रामलीला
प्रीत विहार में बच्चों की यह रामलीला पिछले कई वर्षों से आयोजित की जा रही है। आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को रामायण के प्रसंगों, उनके पात्रों और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना है।
रामलीला के अध्यक्ष योगेश अरोड़ा और स्कूल संचालक छवि नारायण अरोड़ा भी इस आयोजन से जुड़े हैं। शिक्षकों के मार्गदर्शन में तैयार होने वाले बच्चे इस मंच के माध्यम से अभिनय के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी का अनुभव प्राप्त करते हैं।
## बच्चों को संस्कृति और परंपरा से जोड़ने की पहल
आज के समय में बच्चों की पढ़ाई और दूसरी गतिविधियों के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। रामलीला जैसे आयोजन बच्चों को भारतीय परंपराओं और धार्मिक कथाओं से परिचित कराने का एक माध्यम बन सकते हैं।
प्रीत विहार में आयोजित इस रामलीला में बच्चों को मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। संवाद याद करने, अभिनय करने और समूह के साथ तालमेल बैठाने के दौरान वे अनुशासन और सहयोग का अनुभव भी प्राप्त करते हैं।
**कुल मिलाकर, प्रीत विहार की यह रामलीला बच्चों की प्रतिभा, शिक्षकों की मेहनत और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का उदाहरण है। रामायण के पात्रों को बच्चों के जरिए मंच पर प्रस्तुत करने की यह पहल नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास करती है।**


