जापान के 3 F-2A फाइटर जेट पहली बार भारत में उतरेंगे, जोधपुर में होगा ‘वीर गार्जियन 2026’
भारत-जापान के संयुक्त हवाई अभ्यास में Su-30MKI और जापानी F-2A के बीच डिसिमिलर एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग, अमेरिकी टैंकर विमान देंगे हवा में ईंधन

जापान के 3 F-2A फाइटर जेट पहली बार भारत में उतरेंगे, जोधपुर में Su-30MKI से होगा हवाई अभ्यास
भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती देने वाला एक महत्वपूर्ण सैन्य अभ्यास जल्द होने जा रहा है। जापान की एयर सेल्फ-डिफेंस फोर्स यानी JASDF के तीन F-2A लड़ाकू विमान पहली बार भारतीय धरती पर उतरने जा रहे हैं। ये विमान राजस्थान के जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पर पहुंचेंगे, जहां भारत और जापान की वायु सेनाएं संयुक्त हवाई अभ्यास ‘वीर गार्जियन 2026’ में हिस्सा लेंगी।
यह अभ्यास केवल दो देशों की वायु सेनाओं के बीच नियमित सैन्य गतिविधि नहीं है, बल्कि इसे भारत-जापान के बढ़ते रक्षा सहयोग के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। इस अभ्यास के दौरान दोनों देशों के पायलट अलग-अलग क्षमताओं वाले लड़ाकू विमानों के साथ हवाई युद्ध की परिस्थितियों में प्रशिक्षण हासिल करेंगे।
पहली बार भारतीय धरती पर जापान के F-2A
जापान के तीन F-2A फाइटर जेट पहली बार भारत में किसी संयुक्त सैन्य अभ्यास के लिए पहुंचेंगे। जापानी विमानों की यह तैनाती दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग को दर्शाती है।
इन विमानों को जापान के ओकिनावा स्थित नाहा एयर बेस से भारत के लिए रवाना किया जाएगा। भारत तक पहुंचने के लिए विमान थाईलैंड के रास्ते जोधपुर पहुंचेंगे। दोनों देशों के बीच लंबी दूरी और विमान की फेरी उड़ान की जरूरतों को देखते हुए इस मिशन के लिए विशेष लॉजिस्टिक व्यवस्था की गई है।
जापान से जोधपुर तक सीधी दूरी करीब 5,600 किलोमीटर बताई जा रही है। इतनी लंबी दूरी को देखते हुए विमान की यात्रा में हवा में ईंधन भरने की सुविधा भी महत्वपूर्ण होगी।
अमेरिकी टैंकर विमान की भी भूमिका
जापानी F-2A विमानों की भारत तक यात्रा में अमेरिकी वायुसेना के टैंकर विमानों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। लंबी दूरी की उड़ान के दौरान हवा में ईंधन भरने यानी एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग की सुविधा विमानों को लंबी दूरी तय करने में मदद करती है।
यह व्यवस्था दिखाती है कि आधुनिक हवाई अभियानों में केवल लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि उनके साथ काम करने वाले सपोर्ट सिस्टम भी कितने महत्वपूर्ण होते हैं। लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों में लॉजिस्टिक सपोर्ट, ईंधन और तकनीकी तैयारियां अभियान का अहम हिस्सा होती हैं।
Su-30MKI और F-2A के बीच होगा अभ्यास
‘वीर गार्जियन 2026’ का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भारत और जापान के लड़ाकू विमानों के बीच होने वाला हवाई युद्ध प्रशिक्षण है। इस दौरान भारतीय वायुसेना के Su-30MKI और जापान के F-2A विमानों के बीच डिसिमिलर एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग यानी अलग-अलग प्रकार के विमानों के बीच हवाई युद्ध अभ्यास किया जाएगा।
डिसिमिलर एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग का उद्देश्य पायलटों को ऐसे विमानों के खिलाफ अभ्यास का अनुभव देना होता है, जिनकी डिजाइन, उड़ान क्षमता और परिचालन विशेषताएं अलग हो सकती हैं। इससे पायलटों को अलग-अलग परिस्थितियों में अपनी रणनीति और निर्णय क्षमता को बेहतर बनाने का अवसर मिलता है।
भारतीय वायुसेना के Su-30MKI और जापानी F-2A अलग-अलग प्लेटफॉर्म हैं। ऐसे में इनके बीच होने वाला प्रशिक्षण दोनों देशों के पायलटों के लिए व्यावहारिक और पेशेवर अनुभव प्रदान कर सकता है।
2023 में भी हुआ था संयुक्त अभ्यास
भारत और जापान की वायु सेनाओं के बीच इससे पहले भी संयुक्त अभ्यास हो चुका है। साल 2023 में भारतीय वायुसेना के Su-30MKI ने जापान में आयोजित संयुक्त हवाई अभ्यास में हिस्सा लिया था। उस समय भारतीय लड़ाकू विमानों ने जापान जाकर अभ्यास किया था।
अब जापानी F-2A विमानों का पहली बार भारत आना इस सहयोग का एक महत्वपूर्ण अगला चरण माना जा रहा है। इससे दोनों देशों की वायु सेनाओं को एक-दूसरे के संचालन और प्रशिक्षण प्रक्रियाओं को करीब से समझने का मौका मिलेगा।
‘वीर गार्जियन 2026’ क्यों है खास?
‘वीर गार्जियन’ भारत और जापान के बीच बढ़ते रक्षा संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। दोनों देश पिछले कुछ वर्षों में रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में सहयोग को लगातार बढ़ा रहे हैं।
संयुक्त सैन्य अभ्यासों के जरिए दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के साथ काम करने, संचार स्थापित करने और अलग-अलग परिचालन परिस्थितियों में प्रशिक्षण लेने का अवसर मिलता है। इससे दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी समझ और पेशेवर सहयोग मजबूत हो सकता है।
‘वीर गार्जियन 2026’ में जापान के F-2A विमानों की भारत में पहली तैनाती इसलिए भी अहम है क्योंकि यह अभ्यास दोनों देशों के हवाई प्लेटफॉर्मों को एक ही ऑपरेशनल वातावरण में प्रशिक्षण का अवसर देगा।
भारत-जापान रक्षा साझेदारी को नई मजबूती
भारत और जापान के संबंध केवल आर्थिक और कूटनीतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
संयुक्त सैन्य अभ्यास दोनों देशों को अपनी सेनाओं की क्षमताओं को समझने और आपसी समन्वय बेहतर करने का अवसर देते हैं। ऐसे अभ्यास वास्तविक युद्ध की जगह प्रशिक्षण वातावरण में पायलटों और सैन्य दलों को अलग-अलग परिस्थितियों का अनुभव प्रदान करते हैं।
जोधपुर में होने वाला यह अभ्यास राजस्थान के रेगिस्तानी और खुले हवाई क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा। यहां भारतीय वायुसेना नियमित रूप से विभिन्न प्रकार के हवाई अभ्यास करती रही है।
पहली बार F-2A की भारत यात्रा पर नजर
जापान के F-2A लड़ाकू विमानों की भारत यात्रा को दोनों देशों के रक्षा सहयोग के नजरिए से करीब से देखा जा रहा है। जापानी विमानों का लंबी दूरी तय करके भारत पहुंचना अपने आप में एक जटिल लॉजिस्टिक अभियान है।
नाहा एयर बेस से रवाना होकर थाईलैंड के रास्ते जोधपुर पहुंचने वाले इन विमानों के साथ सपोर्ट और रिफ्यूलिंग व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। इसके बाद भारतीय और जापानी वायुसेना के विमान संयुक्त प्रशिक्षण गतिविधियों में हिस्सा लेंगे।
कुल मिलाकर, ‘वीर गार्जियन 2026’ भारत और जापान के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग की दिशा में एक अहम कदम है। जापान के तीन F-2A विमानों का पहली बार भारत आना इस अभ्यास को खास बनाता है। वहीं Su-30MKI और F-2A के बीच डिसिमिलर एयर कॉम्बैट ट्रेनिंग से दोनों देशों के पायलटों को अलग-अलग लड़ाकू विमानों के साथ हवाई युद्ध प्रशिक्षण का अनुभव मिलेगा। यह अभ्यास दोनों वायु सेनाओं के बीच आपसी समझ, समन्वय और पेशेवर सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।



