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गुजरात में मनरेगा मजदूरों का 43.44 करोड़ रुपये बकाया, कांग्रेस ने अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की

गुजरात में मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों के भुगतान में देरी का मामला सामने आया है। कांग्रेस का दावा है कि 43.44 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। भावनगर जिले में भी 2.66 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि का मुद्दा उठाया गया है।

# गुजरात में मनरेगा मजदूरों के 43.44 करोड़ रुपये बकाया, कांग्रेस ने अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की

**गुजरात:** गुजरात में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत काम करने वाले मजदूरों के भुगतान में देरी का मामला सामने आया है। कांग्रेस ने दावा किया है कि राज्य में मजदूरों की 43.44 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान लंबित है। पार्टी ने इस मामले को गंभीर बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

कांग्रेस के अनुसार, मजदूरों को समय पर मेहनत की कमाई नहीं मिलना चिंता का विषय है। मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना और उनकी आजीविका को सहारा देना है। ऐसे में मजदूरी के भुगतान में देरी होने से उन परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जो रोजमर्रा की जरूरतों के लिए इस आय पर निर्भर हैं।

## 15 दिनों के भीतर भुगतान का नियम

मनरेगा के नियमों के मुताबिक, काम पूरा होने के बाद मजदूरों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत 15 दिनों के भीतर मजदूरी का भुगतान किया जाना चाहिए। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण श्रमिकों को उनकी मेहनत का पैसा समय पर मिले।

कांग्रेस ने भुगतान में देरी का मुद्दा उठाते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मजदूरों को समय पर भुगतान मिलना चाहिए और बकाया राशि के निपटारे के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

## भावनगर में भी लाखों रुपये का भुगतान लंबित

कांग्रेस नेता गोहिल ने भावनगर जिले का उदाहरण देते हुए मनरेगा मजदूरों की बकाया राशि का मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक, जिले में मजदूरों का 2 करोड़ 66 लाख 1 हजार 850 रुपये का भुगतान लंबित है।

इस मामले में भावनगर जिला ग्रामीण विकास एजेंसी के निदेशक की ओर से 17 सितंबर 2026 को ग्रामीण विकास आयुक्त को लिखे गए पत्र का भी जिक्र किया गया। इस पत्र के हवाले से भुगतान से जुड़े मुद्दे को सामने रखा गया है।

भावनगर का मामला यह सवाल खड़ा करता है कि ग्रामीण रोजगार योजना के तहत काम करने वाले श्रमिकों को उनकी मजदूरी समय पर क्यों नहीं मिल पा रही है। हालांकि, बकाया भुगतान के कारणों और उसके निपटारे की समयसीमा को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना जरूरी है।

## कांग्रेस ने उठाई जवाबदेही तय करने की मांग

कांग्रेस ने मनरेगा मजदूरों के भुगतान में देरी को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मजदूरों को उनके काम का पैसा मिलना चाहिए और भुगतान में देरी के लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए।

मनरेगा ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके तहत मिलने वाली मजदूरी से अनेक परिवार अपनी दैनिक जरूरतें पूरी करते हैं। ऐसे में भुगतान लंबे समय तक अटका रहने पर उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।

## मजदूरों को समय पर भुगतान बड़ी चुनौती

मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए रोजगार उपलब्ध कराने के साथ मजदूरी का समय पर भुगतान भी जरूरी है। भुगतान में देरी होने पर योजना के उद्देश्य और मजदूरों को मिलने वाले आर्थिक सहारे पर असर पड़ सकता है।

गुजरात में 43.44 करोड़ रुपये के कथित बकाया भुगतान का मुद्दा उठने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और मजदूरों को उनकी लंबित मजदूरी कब तक मिल पाती है।

**निष्कर्ष:** गुजरात में मनरेगा मजदूरों के भुगतान में देरी को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। भावनगर जिले में 2.66 करोड़ रुपये से अधिक की बकाया राशि का मामला भी सामने रखा गया है। अब मजदूरों को लंबित भुगतान मिलने और मामले में जवाबदेही तय होने पर नजर रहेगी।

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