उत्तर प्रदेश

308 पहियों वाला ‘महाबली’ ट्रक 6 महीने से सफर में, बेल्जियम से चला अब लखीमपुर खीरी पहुंचेगा

बेल्जियम से अप्रैल में शुरू हुआ 308 पहियों वाले 'महाबली' ट्रक का सफर, चंदौली में रास्ते की चुनौती के चलते रुका, अब लखीमपुर खीरी पहुंचने में लगेंगे 2-3 सप्ताह

### 308 पहियों वाला ‘महाबली’ ट्रक 6 महीने से सफर में, बेल्जियम से चला अब लखीमपुर खीरी पहुंचेगा

**लखनऊ:** उत्तर प्रदेश की सड़कों पर इन दिनों 308 पहियों वाला विशालकाय ‘महाबली’ ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस विशेष ट्रेलर पर बेल्जियम से लाई गई भारी-भरकम मशीन लदी है, जिसे उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के कुंभी में बन रहे बायोप्लास्टिक प्लांट तक पहुंचाया जा रहा है। विशाल आकार और भारी वजन के कारण इस ट्रक की रफ्तार बेहद धीमी है और रास्ते में कई जगहों पर विशेष इंतजाम करने पड़ रहे हैं।

### अप्रैल में बेल्जियम से शुरू हुआ सफर

इस विशाल मशीन की यात्रा अप्रैल 2026 में बेल्जियम से शुरू हुई थी। मशीन को समुद्री रास्ते से भारत भेजा गया और करीब एक महीने के सफर के बाद यह ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंची। इसके बाद इसे सड़क मार्ग से लखीमपुर खीरी ले जाने के लिए 308 पहियों वाले विशेष ट्रेलर पर लादा गया।

पारादीप से ट्रक झारखंड और बिहार के रास्ते उत्तर प्रदेश की सीमा में दाखिल हुआ। इसके बाद यह चंदौली पहुंचा, जहां विशाल वाहन के आकार के कारण आगे का रास्ता निकालना चुनौती बन गया।

### 164 टन से ज्यादा वजन और 41 मीटर लंबाई

जिस मशीन को ट्रक पर लादकर ले जाया जा रहा है, वह सामान्य औद्योगिक सामान की तुलना में बेहद विशाल है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक मशीन की लंबाई करीब **41 मीटर**, चौड़ाई करीब **6 मीटर** और ऊंचाई करीब **7 मीटर** है। इसका वजन लगभग **164.28 मीट्रिक टन** बताया गया है।

इतने बड़े आकार के कारण इसे सामान्य ट्रक से ले जाना संभव नहीं था। इसी वजह से कई एक्सल और 308 पहियों वाले विशेष ट्रेलर का इस्तेमाल किया गया है। यह वाहन भारी मशीन को स्थिर तरीके से सड़क मार्ग से ले जाने के लिए तैयार किया गया है।

### चंदौली में क्यों अटका था ‘महाबली’?

25 सितंबर को यह विशाल वाहन चंदौली जिले की सीमा में पहुंचा था। पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के पास नेशनल हाईवे-19 और रिंग रोड के आसपास इसे आगे बढ़ने में दिक्कत आई। मशीन की ऊंचाई और चौड़ाई के कारण सामान्य रास्ता पर्याप्त नहीं था।

लॉजिस्टिक्स टीम ने संबंधित विभागों और अधिकारियों के साथ मिलकर वैकल्पिक रास्ता तैयार किया। कुछ जगहों पर सड़क और सर्विस लेन की स्थिति भी चुनौती बनी। दलदली जमीन के कारण ट्रेलर को एक स्थान पर रोकना पड़ा। इससे इस विशाल वाहन की यात्रा और धीमी हो गई।

इससे पहले रास्ते में एक फुट ओवरब्रिज भी बाधा बना था, जिसे क्रेन की मदद से उठाकर वाहन के लिए रास्ता साफ किया गया था। भारी वाहन की सुरक्षित आवाजाही के लिए पुलिस और तकनीकी टीमों को भी तैनात किया गया।

### चार दिनों में सिर्फ 20-25 किलोमीटर का सफर

रास्ते की जटिल परिस्थितियों के कारण इस महाबली ट्रक की रफ्तार सामान्य वाहनों से काफी कम है। चंदौली क्षेत्र में यह वाहन चार दिनों में करीब 20 से 25 किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाया। बाद में वैकल्पिक रास्ता तैयार होने के बाद इसे वाराणसी की ओर आगे रवाना किया गया।

लॉजिस्टिक्स टीम के मुताबिक, रास्ते में ऊंचाई और चौड़ाई से जुड़े अवरोधों को संबंधित विभागों की अनुमति और सहयोग से दूर किया जा रहा है।

### देखने के लिए उमड़ रही भीड़

308 पहियों वाले इस विशाल ट्रक को देखने के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के इलाकों से भी लोग पहुंच रहे हैं। कई लोग इसकी तस्वीरें और वीडियो बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इसकी तस्वीरें और वीडियो चर्चा में हैं।

चंदौली में ट्रक के रुकने के दौरान इसे देखने के लिए काफी संख्या में लोग जुटे। इतने बड़े वाहन और उस पर रखी मशीन को देखकर लोगों में खासा कौतूहल देखने को मिला।

### कहां पहुंचना है ‘महाबली’?

इस विशाल मशीन को उत्तर प्रदेश के **लखीमपुर खीरी के कुंभी** में बन रहे बायोप्लास्टिक यानी पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में लगाया जाना है। रिपोर्टों के मुताबिक यह परियोजना बलरामपुर चीनी मिल से जुड़ी है।

चंदौली से आगे ट्रक को वाराणसी की दिशा में ले जाया गया है। इसके बाद प्रस्तावित मार्ग में गाजीपुर, गोरखपुर और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की दिशा शामिल है। लॉजिस्टिक्स टीम ने अनुमान जताया है कि अगर रास्ते में बड़ी बाधा नहीं आती है तो ट्रक को लखीमपुर खीरी पहुंचने में करीब **दो से तीन सप्ताह** और लग सकते हैं।

### हर कदम पर चुनौती

इस महाबली ट्रक की यात्रा सामान्य सड़क परिवहन से बिल्कुल अलग है। वाहन के आकार के कारण पुल, ओवरब्रिज, सड़क की चौड़ाई, मोड़ और जमीन की मजबूती जैसी चीजों की पहले से जांच करनी पड़ रही है। जहां सामान्य रास्ता पर्याप्त नहीं है, वहां वैकल्पिक मार्ग तैयार किया जा रहा है।

फिलहाल 308 पहियों वाला यह विशाल ट्रक उत्तर प्रदेश में अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा है। बेल्जियम से शुरू हुआ यह लंबा सफर अब अंतिम चरण में है, लेकिन लखीमपुर खीरी तक पहुंचने से पहले इसे अभी कई और सड़क चुनौतियों से गुजरना होगा।

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