अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास, मायावती की शर्त के बाद लिया बड़ा फैसला
बसपा के पूर्व नेशनल कोऑर्डिनेटर ने कहा- 35 साल से बहुजन मिशन के लिए काम किया, अब राजनीति से रहूंगा दूर

अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास, मायावती की शर्त के बाद बड़ा ऐलान; आकाश आनंद पर भी कही बड़ी बात
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी के पूर्व राज्यसभा सांसद और नेशनल कोऑर्डिनेटर रहे डॉ. अशोक सिद्धार्थ ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान किया है। यह घोषणा बसपा सुप्रीमो मायावती के उस बयान के तुरंत बाद हुई है, जिसमें उन्होंने पार्टी और आकाश आनंद से जुड़े विवाद को लेकर कुछ शर्तें रखी थीं।
अशोक सिद्धार्थ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबा पत्र जारी कर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह पिछले 35 वर्षों से बहुजन समाज पार्टी, कांशीराम और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों एवं मिशन के लिए पूरी निष्ठा के साथ काम करते रहे हैं।
‘मेरे राजनीति में रहने से मिशन को नुकसान है तो…’
अपने पत्र में अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि यदि बसपा प्रमुख मायावती को लगता है कि उनके राजनीति में रहने से संतों, गुरुओं और महापुरुषों के बहुजन मिशन को किसी तरह का नुकसान हो रहा है, तो वह राजनीति से अलग होने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने अपने फैसले को पार्टी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से जोड़ते हुए कहा कि उनका उद्देश्य हमेशा बहुजन मिशन को आगे बढ़ाना रहा है। अब उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने का फैसला किया है।
आकाश आनंद को लेकर भी साफ किया रुख
अशोक सिद्धार्थ ने आकाश आनंद को दोबारा जिम्मेदारी दिए जाने के सवाल पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आकाश आनंद को वापस जिम्मेदारी देना या न देना पूरी तरह मायावती का फैसला है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके राजनीति से संन्यास लेने के फैसले को आकाश आनंद की वापसी से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, वह एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में भी बहुजन मिशन से जुड़े रह सकते हैं।
मायावती ने क्या रखी थी शर्त?
दरअसल, बसपा प्रमुख मायावती ने सोशल मीडिया पर एक कड़ा बयान जारी करते हुए पार्टी के भीतर चल रहे विवाद पर अपना रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने अपने बयान में चार बिंदुओं के जरिए पार्टी संगठन और नेताओं को लेकर स्थिति साफ करने की कोशिश की।
मायावती के बयान के बाद ही अशोक सिद्धार्थ ने सक्रिय राजनीति से संन्यास का ऐलान किया। इस घटनाक्रम ने बसपा के भीतर चल रही खींचतान को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
बसपा में अंदरूनी विवाद के बीच बड़ा फैसला
अशोक सिद्धार्थ लंबे समय तक बसपा के महत्वपूर्ण नेताओं में रहे हैं। राज्यसभा सांसद रहने के अलावा वह पार्टी संगठन में नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। ऐसे समय में उनका राजनीति से अलग होने का फैसला पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बसपा के भीतर नेतृत्व, संगठन और आकाश आनंद की भूमिका को लेकर पिछले कुछ समय से चर्चा होती रही है। ऐसे में अशोक सिद्धार्थ का यह कदम पार्टी की आगे की रणनीति और संगठनात्मक समीकरणों पर असर डाल सकता है।



