Pithori Amavasya 2026: पिठोरी अमावस्या की व्रत कथा, सात पुत्रों की मृत्यु और 64 योगिनियों की पूजा
भाद्रपद अमावस्या पर पढ़ें पिठोरी अमावस्या की पौराणिक कथा, संतान सुख और परिवार की मंगलकामना से जुड़ा है व्रत

## Pithori Amavasya 2026: सात पुत्रों की मृत्यु से जुड़ी है पिठोरी अमावस्या की कथा, जानें 64 योगिनियों की पूजा का महत्व
**नई दिल्ली:** हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन पितरों का स्मरण, स्नान, दान और पूजा-पाठ करने की परंपरा है। भाद्रपद महीने में पड़ने वाली अमावस्या को **पिठोरी अमावस्या** कहा जाता है। यह दिन विशेष रूप से संतान की सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली और संतान की लंबी आयु की कामना से जुड़े व्रत और पूजा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
पिठोरी अमावस्या से जुड़ी एक पौराणिक कथा भी प्रचलित है। इस कथा में एक ऐसी मां का वर्णन मिलता है, जिसे बार-बार अपनी संतान को खोने का दुख झेलना पड़ा। उसके सात पुत्रों की एक-एक करके मृत्यु हो गई। इसके बाद वह बेहद दुखी हो गई और संतान की रक्षा के उपाय की तलाश करने लगी।
### सात पुत्रों की मृत्यु की कथा
मान्यता के अनुसार, एक महिला के घर संतान तो होती थी, लेकिन अमावस्या के आसपास उसके पुत्रों की मृत्यु हो जाती थी। समय बीतने के साथ उसके सातों पुत्रों की मृत्यु हो गई। लगातार संतान खोने के कारण वह महिला अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी।
कथा के अनुसार, अपने दुख से परेशान होकर महिला ने संतान की रक्षा और परिवार के कल्याण के लिए धार्मिक उपाय करने शुरू किए। इसी क्रम में उसे पिठोरी अमावस्या के व्रत और पूजा के महत्व के बारे में जानकारी मिली।
मान्यता है कि पिठोरी अमावस्या पर विधि-विधान से पूजा करने और देवी-देवताओं का स्मरण करने से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इसी धार्मिक विश्वास के कारण इस दिन कई महिलाएं संतान की मंगलकामना के लिए व्रत रखती हैं।
### पिठोरी अमावस्या पर 64 योगिनियों की पूजा
पिठोरी अमावस्या की पूजा में **64 योगिनियों** का विशेष महत्व बताया गया है। पारंपरिक पूजा पद्धति में आटे या गोबर से देवी-देवताओं और योगिनियों की आकृतियां बनाई जाती हैं। इसके बाद विधि-विधान से उनकी पूजा की जाती है।
64 योगिनियों को देवी शक्ति के विभिन्न स्वरूपों से जोड़कर देखा जाता है। पूजा के दौरान परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की रक्षा की कामना की जाती है।
### कैसे की जाती है पूजा?
पिठोरी अमावस्या के दिन श्रद्धालु सुबह स्नान करके पूजा का संकल्प लेते हैं। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके देवी-देवताओं का पूजन किया जाता है। परंपरा के अनुसार आटे या गोबर से बनाई गई आकृतियों को पूजा में शामिल किया जाता है।
इसके बाद उन्हें फूल, अक्षत, रोली, दीप और नैवेद्य आदि अर्पित किए जाते हैं। परिवार की सुख-शांति और संतान की लंबी आयु के लिए प्रार्थना की जाती है। कई स्थानों पर इस दिन पिठोरी अमावस्या की व्रत कथा भी सुनी या पढ़ी जाती है।
### पितरों के लिए भी खास है अमावस्या
अमावस्या तिथि को पितरों के स्मरण और तर्पण के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार स्नान, दान और पितरों का स्मरण करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन जरूरतमंदों को दान-पुण्य करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
पिठोरी अमावस्या की मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों में कुछ अलग हो सकती हैं। इसलिए पूजा की स्थानीय परंपरा और परिवार की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विधि अपनाई जाती है।
**ध्यान दें:** ऊपर दी गई कथा और पूजा से जुड़ी बातें धार्मिक मान्यताओं और पारंपरिक कथाओं पर आधारित हैं।



